लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज, मेरठ, अपनी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं और समर्पित कर्मियों के लिए प्रसिद्ध है। इस संस्थान में कार्यरत डॉ. दिनेश राणा, उप निरीक्षक (Sub-Inspector) के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन केवल एक कर्मचारी के रूप में नहीं, बल्कि एक सच्चे राष्ट्रसेवक के रूप में करते हैं। उनका जीवन केवल नौकरी तक सीमित नहीं, बल्कि अनुशासन, देशभक्ति और समाजसेवा की प्रेरणादायक कहानी है।
देशभक्ति से प्रारंभ हुई यात्रा
डॉ. दिनेश राणा का व्यक्तित्व बचपन से ही अनुशासनप्रिय और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रहा है। उनका सपना था — “देश की सेवा करना, वर्दी पहनकर भारत माता की रक्षा करना।” यही भावना उन्हें युवावस्था में इंडियन आर्मी की ओर आकर्षित ले गई।
आर्मी में जाने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने एन.सी.सी. (NCC) ज्वाइन की। एनसीसी प्रशिक्षण ने उनके जीवन में अनुशासन, साहस, नेतृत्व और दृढ़ता जैसे गुणों को गहराई से स्थापित किया। वे कहते हैं —
“एनसीसी ने मुझे सिखाया कि सेवा केवल वर्दी पहनकर नहीं, बल्कि हर जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाकर भी की जा सकती है।”
1381 किलोमीटर की साइकिल यात्रा — गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज
देशभक्ति और आत्मबल से प्रेरित होकर डॉ. राणा ने एक ऐसा कार्य किया, जो युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया। उन्होंने 1381 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा पूरी की — यह केवल शारीरिक चुनौती नहीं थी, बल्कि एक संकल्प और संदेश से भरी हुई यात्रा थी।
इस कठिन यात्रा के माध्यम से उन्होंने स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। इस अद्भुत साहस और दृढ़ निश्चय के लिए उनका नाम “गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स” में दर्ज हुआ — जो मेरठ और उत्तर प्रदेश दोनों के लिए गर्व की बात है।
वे मानते हैं —
“यात्रा केवल किलोमीटर नापने का नाम नहीं, बल्कि खुद को परखने और समाज को संदेश देने का माध्यम है।”
पारिवारिक जिम्मेदारियों ने दिशा बदली, लेकिन सेवा का भाव वही रहा
हर व्यक्ति के जीवन में कुछ ऐसे मोड़ आते हैं जब परिस्थितियाँ रास्ता बदल देती हैं, पर लक्ष्य नहीं। डॉ. राणा के साथ भी यही हुआ। आर्मी में जाने का सपना अधूरा रह गया, क्योंकि पारिवारिक जिम्मेदारियों ने उन्हें घर और समाज की ओर लौटने पर विवश किया।
परंतु उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया — बस दिशा बदली। उन्होंने निर्णय लिया कि यदि देश की सेवा वर्दी पहनकर नहीं कर सकते, तो स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से भी राष्ट्र सेवा की जा सकती है। यही सोच उन्हें मेडिकल कॉलेज मेरठ तक लाई।
आज वे लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ में उप निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं — लेकिन उनका समर्पण किसी सैनिक से कम नहीं। उनका मानना है —
“सैन्य सेवा देश की रक्षा करती है, और स्वास्थ्य सेवा देश को स्वस्थ रखती है — दोनों ही राष्ट्र निर्माण की जड़ हैं।”
स्वास्थ्य सेवा में अनुशासन और संवेदना का संगम
मेडिकल कॉलेज जैसे विशाल संस्थान में व्यवस्था बनाए रखना, मरीजों की सुविधा सुनिश्चित करना, और टीमवर्क को बढ़ावा देना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। डॉ. राणा अपनी प्रशासनिक क्षमता, अनुशासन, और मानवीय दृष्टिकोण से इन चुनौतियों का सामना करते हैं।
वे अस्पताल परिसर की स्वच्छता, सुरक्षा और सेवा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देते हैं। चाहे मरीजों की भीड़ हो या आकस्मिक स्थिति — डॉ. राणा हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई देते हैं। उनके सहयोगी बताते हैं कि वे हमेशा “सकारात्मक सोच, सख्त अनुशासन और सहज व्यवहार” के लिए जाने जाते हैं।
उनके अनुसार —
“अस्पताल में सेवा का मतलब केवल दवा देना नहीं, बल्कि मरीज और उसके परिवार के मन में भरोसा जगाना भी है।”
समाजसेवा और प्रेरणा के स्रोत
डॉ. दिनेश राणा केवल अपने दायित्वों तक सीमित नहीं रहते। वे समाज में युवाओं को प्रेरित करने के लिए विभिन्न जनजागरूकता अभियानों में भाग लेते हैं। वे समय-समय पर स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं में जाकर युवाओं को देशप्रेम, फिटनेस, अनुशासन और सेवा के प्रति जागरूक करते हैं।
उन्होंने कई बार “स्वच्छ भारत”, “फिट इंडिया” और “रक्तदान महाअभियान” जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे स्वयं रक्तदान करते हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं।
उनकी सोच सरल लेकिन गहरी है —
“देश सेवा किसी एक पेशे की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।”
परिवार और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन
डॉ. राणा अपने जीवन में संतुलन और अनुशासन के पक्षधर हैं। वे पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी उतनी ही गंभीरता से निभाते हैं, जितनी ईमानदारी से अपने पेशेवर कर्तव्यों का पालन करते हैं। वे मानते हैं कि परिवार से मिली प्रेरणा ही उन्हें आगे बढ़ने की ऊर्जा देती है।
उनकी जीवनशैली अनुशासित है — वे फिटनेस, साइकिलिंग और योग को अपने दिनचर्या का हिस्सा बनाए रखते हैं। उनका मानना है कि स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ समाज की नींव रख सकता है।
एक सच्चे कर्मयोगी की पहचान
डॉ. दिनेश राणा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि चाहे परिस्थिति कोई भी हो, यदि इरादा दृढ़ हो तो सेवा के रास्ते कभी बंद नहीं होते। उन्होंने साबित किया कि देश सेवा केवल सेना की वर्दी में नहीं, बल्कि अस्पताल की वर्दी में भी की जा सकती है।
उनकी सादगी, ईमानदारी और निष्ठा उन्हें एक आदर्श कर्मयोगी बनाती है। वे अपने कार्यों से यह सिखाते हैं कि जीवन का असली अर्थ पद, वेतन या प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा और सेवा के भाव में छिपा है।
निष्कर्ष
डॉ. दिनेश राणा — एक ऐसा नाम, जो साहस, अनुशासन और सेवा की त्रिवेणी है।
आर्मी में जाने की चाह भले अधूरी रह गई हो, लेकिन उन्होंने अपने जीवन को देश और समाज की सेवा में पूरी तरह समर्पित कर दिया।
गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज उनका नाम केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जो व्यक्ति खुद पर विश्वास करता है, वह किसी भी क्षेत्र में इतिहास रच सकता है।
मेडिकल कॉलेज मेरठ में उनकी उपस्थिति न केवल एक अधिकारी के रूप में, बल्कि एक प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में महसूस की जाती है — जो हर दिन अपने कर्मों से यह साबित करते हैं कि “सेवा ही सर्वोत्तम राष्ट्रभक्ति है।”
