न्याय के प्रतीक एस.डी.एम. चन्द्र बाबू

       न्याय के प्रतीक एस.डी.एम. चन्द्र बाबू — ईमानदारी और निडर कार्यशैली से बने जनता के विश्वास का आधार

आजाद एक्सप्रेस समाचार

बिसौली तहसील में आज एक ऐसा नाम है जो ईमानदारी, निष्ठा और न्यायप्रियता का पर्याय बन चुका है — एस.डी.एम. चन्द्र बाबू। अपने सख्त लेकिन न्यायपूर्ण निर्णयों के लिए पहचाने जाने वाले चन्द्र बाबू ने न केवल प्रशासनिक कार्यशैली में नई ऊर्जा भरी है, बल्कि यह भी साबित किया है कि अगर अधिकारी ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करें तो भ्रष्टाचार और दबाव जैसी विकृतियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

जब कोई अधिकारी अपने पद को सेवा और जिम्मेदारी के रूप में देखता है, तब वह जनता के दिलों में विशेष स्थान बना लेता है। चन्द्र बाबू उसी श्रेणी के अधिकारी हैं, जिन्होंने अपनी निष्पक्षता और निर्भीकता से तहसील क्षेत्र में न्याय की नई परंपरा शुरू की है।


⚖️ न्याय की मिसाल बनते एस.डी.एम. चन्द्र बाबू

हर सुबह जब एस.डी.एम. चन्द्र बाबू अपनी अदालत में बैठते हैं, तो कोर्ट का वातावरण अनुशासित और पारदर्शी दिखाई देता है। उनके व्यवहार में न तो दिखावा है और न ही किसी प्रकार का भेदभाव। चाहे मामला किसी आम किसान का हो या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का, निर्णय हमेशा साक्ष्य और सच्चाई के आधार पर ही होता है। यही कारण है कि कोर्ट में आने वाले फरियादी भी उनकी कार्यशैली से संतुष्ट होकर वापस लौटते हैं।

ऐसे कई अवसर आए जब कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए गलत निर्णय कराने का प्रयास किया। लेकिन चन्द्र बाबू ने स्पष्ट शब्दों में कहा —

“मैं किसी के दबाव में काम नहीं करता। मेरे लिए न्याय सर्वोपरि है, और कोर्ट में आने वाले हर व्यक्ति को निष्पक्ष निर्णय मिलना मेरा संकल्प है।”


🚫 दलालों को दी कड़ी चेतावनी

हाल ही में जब उन्हें जानकारी मिली कि कुछ तथाकथित दलाल कोर्ट परिसर में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्होंने बिना देर किए सख्त कदम उठाया।
उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी —

“अगर कोर्ट परिसर में एक भी दलाल दिखाई दिया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

यह बयान न केवल प्रशासनिक दृढ़ता का प्रतीक है, बल्कि यह उन सभी भ्रष्ट तत्वों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है जो न्यायिक व्यवस्था को अपने निजी स्वार्थ के लिए प्रभावित करना चाहते हैं।

चन्द्र बाबू का यह कदम आम जनता में राहत की सांस लेकर आया है। अब फरियादियों को विश्वास हो गया है कि कोर्ट में केवल सच्चाई की आवाज सुनी जाएगी, न कि किसी दलाल या दबाव समूह की।


🌟 ईमानदारी जो सबको प्रेरित करती है

ईमानदार अधिकारी हमेशा समाज के लिए उदाहरण बनते हैं। चन्द्र बाबू की यही ईमानदारी कुछ लोगों को “हजम” नहीं हो रही है। ऐसे कुछ स्वार्थी तत्व उनके खिलाफ झूठी खबरें फैलाने में लगे हुए हैं ताकि उनकी छवि धूमिल की जा सके।
लेकिन सत्य हमेशा सत्य ही रहता है — और जनता सब जानती है।

चन्द्र बाबू की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि लोग उन्हें “ईमानदार न्यायाधीश” के रूप में सम्मान देते हैं। हर दिन सैकड़ों लोग उनकी कोर्ट में आते हैं और अपनी समस्याओं का समाधान न्यायपूर्ण तरीके से पाते हैं।


💬 जनता का विश्वास

बिसौली तहसील के ग्रामीणों और नगरवासियों का कहना है कि जब से चन्द्र बाबू ने कार्यभार संभाला है, तब से न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ी हैं।
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया —

“पहले कोर्ट के चक्कर काटते-काटते थक जाते थे, अब सुनवाई समय पर होती है और फैसला भी निष्पक्ष मिलता है। चन्द्र बाबू जैसे अधिकारी प्रशासन की शान हैं।”

उनकी कार्यशैली में एक विशेष बात यह भी है कि वे किसी को भी अपमानित नहीं करते। फरियादी चाहे गरीब हो या अमीर, उनके साथ व्यवहार हमेशा समान और सम्मानजनक रहता है।


⚙️ दबाव से परे, न्याय के प्रति समर्पित

आज के समय में जब कई अधिकारी राजनीतिक या बाहरी दबाव में आकर निर्णय लेने लगते हैं, वहीं चन्द्र बाबू ने यह साबित किया है कि अगर मन में सच्चाई और न्याय की भावना हो, तो कोई भी दबाव टिक नहीं सकता।
वे कहते हैं —

“मुझे कई बार गलत काम कराने के लिए कहा गया, लेकिन मैं न्याय में विश्वास रखता हूं। मेरा उद्देश्य हर व्यक्ति को न्याय दिलाना है, चाहे उसके पीछे कितनी भी ताकत क्यों न हो।”

यह कथन उनकी निडरता और न्याय के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है।


👏 न्यायिक व्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार

बिसौली तहसील में चन्द्र बाबू की तैनाती के बाद से कोर्ट के माहौल में अनुशासन बढ़ा है। अब कोई भी व्यक्ति बिना कारण कोर्ट परिसर में घूमता दिखाई नहीं देता।
दलालों और बिचौलियों पर अंकुश लगने से जनता का भरोसा बढ़ा है।

उनकी यह सख्त और निष्पक्ष कार्यशैली न केवल वर्तमान न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ बना रही है, बल्कि आने वाले अधिकारियों के लिए भी एक आदर्श उदाहरण स्थापित कर रही है।


🕊️ निष्कर्ष — न्याय के प्रहरी बने चन्द्र बाबू

एस.डी.एम. चन्द्र बाबू सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि न्याय और ईमानदारी के प्रतीक बन चुके हैं।
उनकी सादगी, निष्पक्षता और सख्त प्रशासनिक रुख ने यह दिखा दिया है कि अगर एक अधिकारी ठान ले, तो भ्रष्टाचार और दलाली जैसी बुराइयों का अंत संभव है।

जनता की यही उम्मीद है कि हर तहसील और हर कोर्ट में ऐसे ही अधिकारी हों जो चन्द्र बाबू की तरह “निडर होकर, ईमानदारी से न्याय का पालन करें।”

“जहां न्याय बिकता नहीं, वहां जनता झुकती नहीं —
और चन्द्र बाबू जैसे अधिकारी उस न्याय के सच्चे प्रहरी हैं।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर चित्र प्रदर्शनी और एकता गीत का शुभारंभ

Thu Oct 30 , 2025
Post Views: 38   हल्द्वानी। आजाद एक्सप्रेस समाचार, देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय संचार ब्यूरो, नैनीताल द्वारा सेंट लॉरेंस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हल्द्वानी में पटेल के जीवन पर आधारित दो दिवसीय […]

You May Like

Breaking News