मेरठ में हड़कंप! छात्र नेता का अनोखा विरोध – बारिश के पानी और कीचड़ में बैठकर तोड़ी शिक्षा विभाग की कुंभकरणीय नींद

मेरठ, आजाद एक्सप्रेस समाचार संवाददाता।

भारी बारिश के बीच मेरठ में सोमवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने पूरे शिक्षा विभाग और प्रशासन को झकझोर कर रख दिया। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के छात्र नेता विनीत चपराना ने बेसिक शिक्षा विभाग के दफ्तर के बाहर कीचड़ और पानी में बैठकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे मामले ने तूल पकड़ लिया और प्रशासन को तुरंत हरकत में आना पड़ा।

मामला कैसे शुरू हुआ?

रविवार रात से लगातार हो रही बारिश ने पूरे मेरठ जिले को जलमग्न कर दिया। हालात को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. बी.के. सिंह ने छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सोमवार को सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया। आदेश सुबह 8 से 8:30 बजे तक सभी विद्यालयों तक पहुँच भी गया।

लेकिन हैरानी की बात यह रही कि ज्यादातर स्कूलों ने डीएम के आदेश को नजरअंदाज कर दिया। बच्चे भीगते हुए, गीली किताबों और बैग के साथ स्कूल पहुंचे। अभिभावक परेशान हुए, कई जगह नाराजगी भी दिखी।

छात्र नेता का अनोखा विरोध

जब आदेश का पालन न होने और बच्चों को हुई परेशानी की खबर सामने आई, तो सीसीएसयू छात्र नेता विनीत चपराना मौके पर सक्रिय हुए। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) आशा चौधरी को स्कूलों की मनमानी से अवगत कराया और तुरंत कार्रवाई की मांग की।

लेकिन विभागीय उदासीनता देख वे सीधे बेसिक शिक्षा विभाग के दफ्तर पहुंचे। वहां बारिश का पानी और कीचड़ जमा था। विनीत चपराना ने वहीं जमीन पर बैठकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
उनका यह कदम प्रशासनिक लापरवाही पर करारा तमाचा था।

सोशल मीडिया पर देखते ही देखते उनका वीडियो वायरल हो गया। लोग कहने लगे –
“युवाओं को ऐसे ही प्रशासन की नींद तोड़नी चाहिए।”

शिक्षा विभाग का रुख

प्रदर्शन के बाद बीएसए आशा चौधरी हरकत में आईं। उन्होंने आश्वासन दिया कि आदेश की अवहेलना करने वाले स्कूलों की सूची तैयार की जा रही है और उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बीएसए ने स्पष्ट कहा कि
“प्रशासनिक आदेश की अवहेलना किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।”

जिलाधिकारी का सख्त रुख

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और आम जनता की नाराजगी देखने के बाद जिलाधिकारी डॉ. बी.के. सिंह ने भी इस मामले पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे स्कूलों की पहचान कर तुरंत नोटिस जारी किए जाएं और दोबारा इस तरह की लापरवाही न होने पाए।

डीएम का कहना था –
“जब अवकाश का आदेश जारी कर दिया गया था, तो सभी स्कूलों को उसका पालन करना चाहिए था। बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

बड़ा असर – प्रशासन की टूटी नींद

छात्र नेता के इस अनोखे विरोध का बड़ा असर देखने को मिला।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही आम लोगों ने भी इस मुद्दे को उठाया।

अभिभावकों ने कहा कि आखिर क्यों स्कूल प्रशासन आदेशों को हल्के में लेता है?

शिक्षा विभाग को मजबूरन तुरंत कार्रवाई का भरोसा देना पड़ा।

इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग की उस कुंभकरणीय नींद को तोड़ा, जिसमें अक्सर अधिकारी प्रशासनिक आदेशों को महज कागजों में दबाकर रख देते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया

शहरवासियों ने छात्र नेता की इस पहल की जमकर सराहना की। सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आईं।

एक यूज़र ने लिखा – “बच्चों के लिए आवाज उठाने वाला ऐसा ही छात्र नेता चाहिए।”

दूसरे ने कहा – “अगर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता तो इस विरोध की नौबत ही नहीं आती।”

क्यों महत्वपूर्ण है यह विरोध?

मेरठ जैसे बड़े शहर में शिक्षा विभाग की लापरवाही कोई नई बात नहीं है।

कभी फीस वसूली पर विवाद होता है।

कभी सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है।

और अब आदेश के बावजूद स्कूल खोलने का मामला सामने आया।

छात्र नेता विनीत चपराना का विरोध इस लिहाज से अहम है कि इससे न केवल बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा उठा बल्कि विभागीय लापरवाही पर भी सीधा सवाल खड़ा हुआ।

नतीजा और आगे की राह

विरोध और वायरल वीडियो के बाद मेरठ प्रशासन ने दावा किया है कि ऐसे सभी स्कूलों की पहचान की जाएगी जिन्होंने आदेश की अवहेलना की। कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

शहरवासियों की उम्मीद है कि यह मामला महज एक दिन की सुर्खियों तक सीमित न रह जाए, बल्कि प्रशासन इससे सबक ले और भविष्य में बच्चों की सुरक्षा के प्रति और ज्यादा गंभीर हो।

निष्कर्ष

मेरठ में छात्र नेता विनीत चपराना का यह विरोध केवल एक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह उन हजारों अभिभावकों की आवाज थी, जो हर बार अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। कीचड़ और बारिश के पानी में बैठकर किया गया यह अनोखा प्रदर्शन शिक्षा विभाग और प्रशासन के लिए एक कड़ा संदेश है कि अब जनता आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगी।

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